aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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Ustad Naeem Salaria
Artist
Isti Tu Univer Sitariyo
Publisher
हाँ, तो मैं कहाँ हूँ, अभी मेरे हवास दुरुस्त नहीं, लेकिन ये ज़मीन और ये आसमान तो कुछ जाने बूझे मालूम होते हैं। लोगों को एक तरफ़ बढ़ता हुआ देख रहा हूँ। मैं भी उन्हीं के साथ हो लूँ... “पहचानता नहीं हूँ अभी राहबर को मैं...” अब इन रास्तों पर...
“और फिर हज़रात आप ये भी ख़याल फ़रमाइए कि उनका क़याम शह्र के एक ऐसे हिस्से में है जो न सिर्फ़ शह्र के बीचों बीच आम गुज़र-गाह है बल्कि शह्र का सबसे बड़ा तिजारती मर्कज़ भी है चुनाँचे हर शरीफ़ आदमी को चार-ओ-ना-चार इस बाज़ार से गुज़रना पड़ता है। अलावा...
शरीफ़ हुसैन क्लर्क दर्जा दोम, मामूल से कुछ सवेरे दफ़्तर से निकला और उस बड़े फाटक के बाहर आ कर खड़ा हो गया जहाँ से ताँगे वाले शहर की सवारियाँ ले जाया करते थे। घर लौटते हुए आधे रास्ते तक ताँगे में सवार हो कर जाना एक ऐसा लुत्फ़ था...
दो चारपाइयाँ इस तौर पर खड़ी करदीं कि उनके पाए आमने-सामने हो गए उनपर एक पर कम्बल-दरी या चादर डाल दी। कमरा तैयार हो गया। घर में बच्चों को इस तरह का हुजरा बनाने का बड़ा शौक़ होता है। यहाँ वह उन तमाम बातों की मश्क़ करते हैं जो माँ-बाप...
savaariyo.n ke ba.De ghu.ngruu.o.n kii jhankaare.nkha.Daa hai os me.n chup-chaap har si.ngaar kaa pe.D
One of the most popular woman poets who gave expression to feelings and experiences specific to women
(4) एक दिन चैन सिंह को किसी काम से कचहरी जाना था। पाँच मील का सफ़र था, यूँ तो वो बराबर अपने घोड़े पर जाया करता था। पर आज धूप तेज़ थी। सोचा यक्के पर चला चलूँ। महाबीर को कहला भेजा, मुझे भी लेते जाना। कोई नौ बजे महाबीर ने...
ये हज़रत देहात के रहने वाले थे। अधेड़ उम्र में इ'ल्म-ए-दीन की तकमील का शौक़ चर्राया और ये अपने गाँव को ख़ैर-बाद कह कर शहर पहुँचे। कुछ दिनों मुख़्तलिफ़ मस्जिदों में फ़िक़्ह हदीस वग़ैरह का दर्स लेते रहे। फिर एक मस्जिद के इमाम बना दिए गए। जो टूटी हुई और...
वो सवारियां जिनको अब्बू क़बूल नहीं करता था दिल ही दिल में उसको गालियां देती थीं। बा’ज़ बद-दुआ भी देती थीं, “ख़ुदा करे इसका घमंड टूटे... इसका टांगा घोड़ा किसी दरिया में जा गिरे।” अब्बू के होंटों पर जो हल्की-हल्की मूंछों की छांव में रहते थे, ख़ुद ए’तिमाद सी मुस्कुराहट...
“नहीं माई।” कंडक्टर ने तंग आकर कहा, “सब सवारियों के नीचे ऐसे ही गद्दे हैं।” बुढ़िया ने हैरान हो कर पूछा, “तो फिर मैं क्या करूँ?”...
स्टेशन मास्टर के कमरे के बाहर प्लेटफ़ार्म की वाहिद बेंच पर दो औरतों ने क़ब्ज़ा जमा रखा है। उनमें से एक अधेड़ उम्र है और एक जवान। अधेड़ एक गठरी सर के नीचे रखे लेटी हुई है और जवान उसके पाएंती बैठी है। अधेड़ उम्र अपनी सीधी-सादी वज़्अ और कपड़ों...
isii jagah par jahaa.n babuulo.n ke KHaar phirte hai.n chuuhiyo.n kii savaariyo.n parjahaa.n parindo.n ko haul aate hai.n raakh u.Dtii hai haDDiyo.n kii
बस मुसाफ़िरों के लिए मुज़्दा कराची में मालिक एसोसिएशन बड़े फ़ख़्र और मसर्रत से ऐलान करती है कि आज से शहर में तमाम बसों के किराए दुगुने कर दिए गए हैं। उम्मीद है मुहिब्ब-ए-वतन हलक़ों में इस फ़ैसले का आम तौर पर ख़ैर-मक़्दम किया जाएगा। क्योंकि इससे बस मालिकान की...
गुलज़ार की दुकान पर हुक़्क़े की गुड़गुड़ की आवाज़ बदस्तूर एक इतमीनान और बेनियाज़ी की कैफ़ीयत काइज़हार किए जा रही थी। छिद्दा ने एक डेढ़ मिनट इंतिज़ार किया और जब हक़ीक़ी आवाज़ में कोई नुमायाँ फ़र्क़ नहीं पड़ा तो उसने तय किया कि तालाब के गर्द एक चक्कर लगा लेना...
दोनों बहुत देर से सड़क पर खड़े हुए किसी सवारी के मुंतज़िर थे। एक दुबला पतला, दूसरा तंदुरुस्त-ओ-तवाना... दोनों सड़क पर गुज़रती हुई मुख़्तलिफ़ सवारियों को रोकने की कोशिश कर रहे थे। दोनों को दूर दराज़ के किसी इलाक़े में जाना था। सड़क पर टहलते हुए वो धीरे धीरे क़रीब...
इंतिज़ार हुसैन का फ़न अपनी क़ुव्वत उन तमाम सर-चश्मों से हासिल करता है जो तहज़ीबी रिवायात का मम्बा हैं यानी यादें, ख़्वाब-ओ-औलिया के क़िस्से, देवमाला, तवह्हुमात, एक पूरी क़ौम का इज्तिमाई मिज़ाज, उसका किरदार और उसकी शख़्सियत। इंतिज़ार हुसैन के शुऊर-ओ-एहसास के ज़रिए एक गुम-शुदा दुनिया अचानक फिर से अपने...
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