आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",DIj7"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम ",Dij7"
ग़ज़ल
शिकवा नहीं है अर्ज़ है मुमकिन अगर हो आप से
दीजे मुझ को ग़म ज़रूर दिल जो मिरा उठा सके
हकीम नासिर
ग़ज़ल
मुझ तलक क़ातिल तो क़ातिल मौत भी आती नहीं
किस को दीजे जान जब ख़्वाहान-ए-जाँ कोई न हो