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ग़ज़ल
हज़रत-ए-नासेह गर आवें दीदा ओ दिल फ़र्श-ए-राह
कोई मुझ को ये तो समझा दो कि समझावेंगे क्या
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ऐतबार साजिद
ग़ज़ल
है फ़रोग़-ए-माह से हर मौज इक तस्वीर-ए-चाक
सैल से फ़र्श-ए-कताँ करते हैं ता-वीराना हम
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
दस्त-गाह-ए-दीदा-ए-खूँ-बार-ए-मजनूँ देखना
यक-बयाबाँ जल्वा-ए-गुल फ़र्श-ए-पा-अंदाज़ है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
मिज़ा फ़र्श-ए-रह-ओ-दिल ना-तवान-ओ-आरज़ू मुज़्तर
ब-पा-ए-ख़ुफ़्ता सैर-ए-वादी-ए-पुर-ख़ार-ए-बिस्तर है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ये कू-ए-यार ये ज़िंदाँ ये फ़र्श-ए-मय-ख़ाना
इन्हें हम अहल-ए-तमन्ना के नक़्श-ए-पा कहिए