रोज़ ख़ूँ होते हैं दो-चार तिरे कूचे में

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

रोज़ ख़ूँ होते हैं दो-चार तिरे कूचे में

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

MORE BYमुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

    रोज़ ख़ूँ होते हैं दो-चार तिरे कूचे में

    एक हंगामा है यार तिरे कूचे में

    every day, some in your street are slain

    my love, a furor now infests your lane

    फ़र्श-ए-रह हैं जो दिल-अफ़गार तिरे कूचे में

    ख़ाक हो रौनक़-ए-गुलज़ार तिरे कूचे में

    with bloodied hearts your street is littered now

    your street can never have the garden's glow

    सरफ़रोश आते हैं यार तिरे कूचे में

    गर्म है मौत का बाज़ार तिरे कूचे में

    as ardent martyrs, in your street arrive

    death's marketplace begins to hum and thrive

    शेर बस अब कहूँगा कि कोई पढ़ता था

    अपने हाली मिरे अशआर तिरे कूचे में

    I'll speak no more, as someone does repeat

    as if his own, my verses, in your street

    मिला हम को कभी तेरी गली में आराम

    हुआ हम पे जुज़ आज़ार तिरे कूचे में

    no comfort in your street I ever found

    save torture nothing else was all around

    मलक-उल-मौत के घर का था इरादा अपना

    ले गया शौक़-ए-ग़लत-कार तिरे कूचे में

    To go to death's abode resolved, in vain,

    but wayward wishes led me to your lane

    तू है और ग़ैर के घर जल्वा-तराज़ी की हवस

    हम हैं और हसरत-ए-दीदार तिरे कूचे में

    at my rival's home you preen and prance

    whilst in your lane I yearn for just a glance

    हम भी वारस्ता-मिज़ाजी के हैं अपनी क़ाइल

    ख़ुल्द में रूह तन-ए-ज़ार तिरे कूचे में

    my love of freedom will ever remain

    my soul in heaven, body in your lane

    क्या तजाहुल से ये कहता है कहाँ रहते हो

    तिरे कूचे में सितमगार तिरे कूचे में

    of my address such ignorance you feign

    tis in your lane, O tyrant, in your lane

    'शेफ़्ता' एक आया तो आया क्या है

    रोज़ रहते हैं दो-चार तिरे कूचे में

    what matters if just Sheftaa stays away?

    as several come, dwell in your lane each day

    RECITATIONS

    फ़सीह अकमल

    फ़सीह अकमल

    फ़सीह अकमल

    रोज़ ख़ूँ होते हैं दो-चार तिरे कूचे में फ़सीह अकमल

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