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ग़ज़ल
हाँ जज़्बा-ए-ईमाँ की तस्दीक़ तो हो पहले
वा'दा है कि कौसर का इक जाम तुम्हें देंगे
डॉ. मोहम्मद जमाल
ग़ज़ल
न दिल में जज़्बा-ए-ईमाँ न सौदा सरफ़रोशी का
तो फिर क्यों चाहते हो आग का गुलज़ार हो जाना
फ़रज़ाना एजाज़
ग़ज़ल
ग़ाफ़िल हूँ तिरी याद से ऐसा तो नहीं है
हर-वक़्त मिरे दिल में तिरी याद मकीं है
पंडित विद्या रतन आसी
ग़ज़ल
बे-अमाँ हूँ इन दिनों मैं दर-ब-दर फिरता हूँ मैं
मैं मवद्दत हूँ वफ़ा हूँ ख़ैर का जज़्बा हूँ मैं
अरशद जमाल सारिम
ग़ज़ल
दिल के का'बे को गिरा देता है डरता भी नहीं
कौन है हज्जाज-बिन-यूसुफ़ जो मरता भी नहीं
इक़तिदार जावेद
ग़ज़ल
जज़्बा-ए-हमसरी हर रुख़ से अयाँ होता है
तेरी महफ़िल में जहाँ मेरा बयाँ होता है
माया खन्ना राजे बरेलवी
ग़ज़ल
नज़र में जज़्ब शम्अ-ए-रुख़ का जल्वा कर लिया मैं ने
दिल-ए-तारीक में आख़िर उजाला कर लिया मैं ने