दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना

चकबस्त ब्रिज नारायण

दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना

चकबस्त ब्रिज नारायण

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    रोचक तथ्य

    The sher "Zindagi kya hai anaasir mein..." of this ghazal shows the unrivalled description of life and death. This sher was also shown as the theme of the film Masaan (2015).

    दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना

    आदमियत है यही और यही इंसाँ होना

    नौ-गिरफ़्तार-ए-बला तर्ज़-ए-वफ़ा क्या जानें

    कोई ना-शाद सिखा दे उन्हें नालाँ होना

    रोके दुनिया में है यूँ तर्क-ए-हवस की कोशिश

    जिस तरह अपने ही साए से गुरेज़ाँ होना

    ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़ुहूर-ए-तरतीब

    मौत क्या है इन्हीं अज्ज़ा का परेशाँ होना

    दफ़्तर-ए-हुस्न पे मोहर-ए-यद-ए-क़ुदरत समझो

    फूल का ख़ाक के तोदे से नुमायाँ होना

    दिल असीरी में भी आज़ाद है आज़ादों का

    वलवलों के लिए मुमकिन नहीं ज़िंदाँ होना

    गुल को पामाल कर लाल-ओ-गुहर के मालिक

    है उसे तुर्रा-ए-दस्तार-ए-ग़रीबाँ होना

    है मिरा ज़ब्त-ए-जुनूँ जोश-ए-जुनूँ से बढ़ कर

    नंग है मेरे लिए चाक-गरेबाँ होना

    क़ैद यूसुफ़ को ज़ुलेख़ा ने किया कुछ किया

    दिल-ए-यूसुफ़ के लिए शर्त था ज़िंदाँ होना

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