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ग़ज़ल
चैन से रहने न दे इन को न ख़ुद आराम कर
मुस्तइद हैं जो ख़िलाफ़त को मिटाने के लिए
सय्यद सादिक़ हुसैन
ग़ज़ल
ज़ुल्फ़ को भी है दम-ब-दम अज़्म-ए-कमंद-ए-अफ़गनी
दाम लिए है मुस्त'इद तुर्रा-ए-ताबदार भी
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
बहर-ए-बला है मौज पर क़हर-ए-क़ज़ा है औज पर
हैं काह-ए-सामाँ मुस्तइद ता ना-गुरेज़ानी करें
अहमद जावेद
ग़ज़ल
नशिस्त में इस क़दर तअम्मुल ब-वक़्त-ए-रुख़्सत
मुरस्सा' ओ मुस्त'इद सवारी में क्या कमी थी
ख़ालिद इक़बाल यासिर
ग़ज़ल
मुशाइरा में पढ़ो शौक़ से ग़ज़ल 'बीमार'
कि मुस्तइद हैं सुख़न-संज मरहबा के लिए
शैख़ अली बख़्श बीमार
ग़ज़ल
हूँ मुस्तइद-ए-रिक़्क़त फ़रहाद मुझे बहला
ले डूबेंगे तुझ को भी कोहसार जो मैं रोया
आग़ा हज्जू शरफ़
ग़ज़ल
ऐ अदम के जाने वालो कोई दम की देर है
मुस्तइद हूँ मैं भी आने के लिए आता हूँ मैं
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ग़ज़ल
क़लम को मुस्तइद-ए-हुब्ब-ए-जाह लिख लीजे
मिरे गुनाहों में और इक गुनाह लिख लीजे
मोहम्मद तारिक़ ग़ाज़ी
ग़ज़ल
मुस्तइद हैं उस बुत-ए-तन्नाज़ पर बहर-ए-निसार
यक तरफ़ सब्र-ओ-दिल-ओ-दीं जान-ओ-ईमाँ यक तरफ़
मिर्ज़ा जवाँ बख़्त जहाँदार
ग़ज़ल
मैं मुस्तइद हूँ अगर नाला-ओ-फ़ुग़ाँ के लिए
तो कुछ से कुछ अभी हो जाए आसमाँ के लिए