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ग़ज़ल
सब को फूल और कलियाँ बाँटो हम को दो सूखे पत्ते
ये कैसे तोहफ़े लाए हो ये क्या बर्ग-फ़रोशी है
जमील मलिक
ग़ज़ल
जहाँ में नफ़रतें बाँटो किसी का क़त्ल करो
तुम्हारे वास्ते कुछ भी हराम थोड़ी है
ज़ुबैर अहमद तन्हा मलिक रामपुरी
ग़ज़ल
ख़ज़ाना इल्म का है ला-ज़वाल ऐसा ज़माने में
जिसे बाँटो तो बढ़ता है प हरगिज़ कम नहीं होता
चमन भटनागर
ग़ज़ल
काँच के ये चमकीले टुकड़े आख़िर ख़ून रुलाते हैं
दिल से सच्ची चीज़ न बाँटो उन झूटे दिल-दारों में
रशीद क़ैसरानी
ग़ज़ल
एक तरफ़ हो तुम अफ़्सुर्दा एक तरफ़ हम आज़ुर्दा
और चमन को बाँटो यारो और करो दीवार बुलंद
इनाम हनफ़ी
ग़ज़ल
दौलत अजब है ये बड़ी बढ़ती है जो बस बाँट कर
रहना अगर है ख़ुश तुम्हें बाँटो सदा सब को ख़ुशी
सदा अम्बालवी
ग़ज़ल
कहीं और बाँट दे शोहरतें कहीं और बख़्श दे इज़्ज़तें
मिरे पास है मिरा आईना मैं कभी न गर्द-ओ-ग़ुबार लूँ
बशीर बद्र
ग़ज़ल
हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले
दर्द ख़ुद बनते हैं ख़ुद अपनी दवा होते हैं