aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chuustaa"
चूसता रहता है रस भौंरा अभी तक देख लोफूल ने भूले से की थी सरपरस्ती एक दिन
दुश्मन तो मेरे तन से लहू चूसता रहामैं दम-ब-ख़ुद खड़ा ही उसे देखता रहा
उस की निगाह फ़ित्ना-अदा तो बहाना थीख़ुद मेरा दिल भी मेरा लहू चूसता रहा
यूँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँजो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँमिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
इश्क़ को दरमियाँ न लाओ कि मैंचीख़ता हूँ बदन की उसरत में
तुम्हारा होने के फ़ैसले को मैं अपनी क़िस्मत पे छोड़ता हूँअगर मुक़द्दर का कोई टूटा कभी सितारा तो मैं तुम्हारा
है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछइस से पहले भी हो चुका है कहीं
फिर चाहता हूँ नामा-ए-दिलदार खोलनाजाँ नज़्र-ए-दिल-फ़रेबी-ए-उनवाँ किए हुए
मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दोतुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे
मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राबमेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई
तेरी गली में सारा दिनदुख के कंकर चुनता हूँ
हो चुका क़त्अ तअ'ल्लुक़ तो जफ़ाएँ क्यूँ होंजिन को मतलब नहीं रहता वो सताते भी नहीं
ऐ दिल की लगी चल यूँही सही चलता तो हूँ उन की महफ़िल मेंउस वक़्त मुझे चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए
बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिएमैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए
अपने होंटों पर सजाना चाहता हूँआ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता हैऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है
बदन चुरा के वो चलता है मुझ से शीशा-बदनउसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूँगा उसे
नवेद-ए-सर-ख़ुशी जब आएगी उस वक़्त तक शायदहमें ज़हर-ए-ग़म-ए-हस्ती गवारा हो चुका होगा
मैं रोकना ही नहीं चाहता था वार उस कागिरी नहीं मिरे हाथों से ढाल वैसे ही
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