aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "corridor"
फिर शौक़ कर रहा है ख़रीदार की तलबअर्ज़-ए-मता-ए-अक़्ल-ओ-दिल-ओ-जाँ किए हुए
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँबाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ
मिरे दामन में शरारों के सिवा कुछ भी नहींआप फूलों के ख़रीदार नज़र आते हैं
मैं तो ख़ुद बिकने को बाज़ार में आया हुआ हूँऔर दुकाँ-दार ख़रीदार समझते हैं मुझे
चश्म दल्लाल-ए-जिंस-ए-रुस्वाईदिल ख़रीदार-ए-ज़ौक़-ए-ख़्वारी है
हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरहउठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह
मैं चाहता हूँ ख़रीदार पर ये खुल जाएनया नहीं हूँ रखा हूँ यहाँ नया कर के
एक तो ख़्वाब लिए फिरते हो गलियों गलियोंउस पे तकरार भी करते हो ख़रीदार के साथ
हम गुल-ए-ख़्वाब सजाते थे दुकान-ए-दिल मेंऔर फिर ख़ुद ही ख़रीदार हुआ करते थे
हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिएकुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए
अजब फ़ुसून-ए-ख़रीदार का असर है कि हमउसी की आँख से अपने हुनर को देखते हैं
बिक जाते हैं हम आप मता-ए-सुख़न के साथलेकिन अयार-ए-तबअ-ए-ख़रीदार देख कर
बाज़ार में ख़ुशबू के ख़रीदार कहाँ हैंये फूल हैं बे-रंग बता दें तो किसे दें
सद कारवाँ वफ़ा है कोई पूछता नहींगोया मता-ए-दिल के ख़रीदार मर गए
शायद आ जाएँ कभी चश्म-ए-ख़रीदार में हमजान ओ दिल बीच में बाज़ार के रख देते हैं
खुला है झूट का बाज़ार आओ सच बोलेंन हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
किस को बिकना था मगर ख़ुश हैं कि इस हीले सेहो गईं अपने ख़रीदार से बातें क्या क्या
ऐसा नादान ख़रीदार भी कोई होगाजो तिरे ग़म के एवज़ सारी ख़ुदाई ले ले
वक़्त को सूद पे दे और न रख कोई हिसाबअब भला कैसा ज़ियाँ कोई ख़रीदार नहीं
तेरे होंठों के तबस्सुम का तलबगार हूँ मैंअपने ग़म बेच दे रद्दी का ख़रीदार हूँ मैं
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