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ग़ज़ल
मैं मुज़्तरिब हूँ वस्ल में ख़ौफ़-ए-रक़ीब से
डाला है तुम को वहम ने किस पेच-ओ-ताब में
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
सब का तो मुदावा कर डाला अपना ही मुदावा कर न सके
सब के तो गरेबाँ सी डाले अपना ही गरेबाँ भूल गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
बहुत मुद्दत के नख़चीरों का अंदाज़-ए-निगह बदला
कि मैं ने फ़ाश कर डाला तरीक़ा शाहबाज़ी का
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं
कि मैं इस आग में डाला गया हूँ मिस्ल-ए-ख़लील
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
हल्क़ा-ए-ख़्वाब को ही गिर्द-ए-गुलू कस डाला
दस्त-ए-क़ातिल का भी एहसाँ न दिवाने से उठा
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
टुकड़े कर डाले कोई उस के तो मैं भी ख़ुश हूँ
दिल न होगा न मिरी जान मोहब्बत होगी
लाला माधव राम जौहर
ग़ज़ल
जो हुस्न तू ने शक्ल को बख़्शा वो बोल उठा
जो रंग तू ने फूल में डाला वो खिल गया
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
ये उन के हुस्न को है सूरत-आफ़रीं से गिला
ग़ज़ब में डाल दिया ला-जवाब कर के मुझे