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ग़ज़ल
जाम-ए-कौसर दस्त-ए-साक़ी में नज़र आया मुझे
उठ गया आँखों का पर्दा अब्र-ए-रहमत देख कर
मुनीर शिकोहाबादी
ग़ज़ल
तौबा-ए-ज़ाहिद के दम पर आ बनी इक आन में
दस्त-ए-साक़ी में लबालब जाम-ए-सहबा देख कर
मुंशी ठाकुर प्रसाद तालिब
ग़ज़ल
मैं दस्त-ए-साक़ी-ए-कौसर को चूमता हूँ 'अली'
ये ख़्वाब है तो हक़ीक़त में ढाल दें साहिब
अली हैदर अल्वी
ग़ज़ल
पारसाई शैख़-साहब की धरी रह जाएगी
दस्त-ए-साक़ी में अगर दम-भर भी साग़र रह गया
अनवरी जहाँ बेगम हिजाब
ग़ज़ल
ख़ुदा रक्खे है कुछ दीवान-ए-‘साक़ी’ भी जज़ाक-अल्लाह
सलासत देखते जाओ रवानी देखते जाओ
अब्दुल ग़फ़ूर साक़ी
ग़ज़ल
लिया जाता न कैसे इम्तिहान-ए-ज़र्फ़ ऐ 'साक़ी'
नज़र हर एक बादा-ख़्वार ने साग़र पे रक्खी थी