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ग़ज़ल
पी के सोचा कि ख़रीदेंगे ग़म-ए-दुनिया भी
तय हुए दाम तो दिरहम भी नहीं साथ अपने
सुलैमान अरीब हैदराबादी
ग़ज़ल
आ दाग़-ए-मोहब्बत के साँचे में तुझे ढालूँ
ख़ातम से मैं कहता हूँ दिरहम से नहीं कहता
मीम हसन लतीफ़ी
ग़ज़ल
ख़्वाहिश-ए-तख़्त न अब दिरहम-ओ-दीनार की गूँज
वादी-ए-चश्म में है हसरत-ए-दीदार की गूँज
सलीम सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
कल इन हाथों से हम ने दिरहम-ओ-दीनार बाँटे थे
अब इन हाथों से हम फेंका हुआ सिक्का नहीं लेते
क़यामुद्दीन क़याम
ग़ज़ल
पिला दे अपने हाथों से ज़रा इक जाम ऐ साक़ी
तिरे मय-कश दर-ओ-दीवार-ओ-दिरहम छोड़ आए हैं