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ग़ज़ल
वो गुल-बदन का अजब है मिज़ाज-ए-रंगा-रंग
फ़जर कूँ लुत्फ़ तो फिर शाम कूँ सितम का सितम
सिराज औरंगाबादी
ग़ज़ल
फ़जर उठ ख़्वाब सीं गुलशन में जब तुम ने मली अँखियाँ
गईं मुँद शर्म सूँ नर्गिस की प्यारे जूँ कली अँखियाँ
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
हम पर ये सख़्ती की नज़र हम हैं फ़क़ीर-ए-रहगुज़र
रस्ता कभी रोका तिरा दामन कभी थामा तिरा
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
दस्त-ए-फ़लक में गर्दिश-ए-तक़दीर तो नहीं
दस्त-ए-फ़लक में गर्दिश-ए-अय्याम ही तो है