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ग़ज़ल
मोहब्बत के लिए दिल ढूँढ़ कोई टूटने वाला
ये वो मय है जिसे रखते हैं नाज़ुक आबगीनों में
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
चश्म-ए-मा रौशन कि उस बेदर्द का दिल शाद है
दीदा-ए-पुर-ख़ूँ हमारा साग़र-ए-सरशार-ए-दोस्त
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
दिल हो ख़याल-ए-यार में आँख हो इंतिज़ार में
मेरे दिल-ए-फ़िगार में हसरत-ए-मा-सिवा नहीं
राजेन्द्र बहादुर माैज
ग़ज़ल
बसे हैं जल्वे कुछ ऐसे निगाह-ए-आशिक़ में
जिसे भी देखे कोई तुझ से मा-सिवा न लगे