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ग़ज़ल
आग़ा हज्जू शरफ़
ग़ज़ल
पन्ना लाल नूर
ग़ज़ल
जिन को रह के काँटों में ख़ुश-मिज़ाज होना था
वो मक़ाम-ए-गुल पा कर बे-दिमाग़ हैं यारो
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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जिन को रह के काँटों में ख़ुश-मिज़ाज होना था
वो मक़ाम-ए-गुल पा कर बे-दिमाग़ हैं यारो