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ग़ज़ल
क्या भला मुझ को परखने का नतीजा निकला
ज़ख़्म-ए-दिल आप की नज़रों से भी गहरा निकला
मुज़फ़्फ़र वारसी
ग़ज़ल
मोहब्बत में परखने जाँचने से फ़ाएदा क्या है
कमी थोड़ी बहुत हर एक के शजरे में रहती है
मुनव्वर राना
ग़ज़ल
परखने वाले परखेंगे इसी मेआ'र पर हम को
जहाँ से क्या लिया हम ने जहाँ को क्या दिया हम ने
अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद
ग़ज़ल
मिरी जाँ सरसरी मिलने से क्या मालूम होता है
परखने से बशर खोटा खरा मालूम होता है