आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pho.Daa"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "pho.Daa"
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
न बतलाई किसी ने भी हक़ीक़त राज़-ए-हस्ती की
बुतों से जा के सर फोड़ा बहुत दैर-ए-बरहमन में
चकबस्त बृज नारायण
ग़ज़ल
फ़रहाद ने क्या देख के सर तेशे से फोड़ा
सूझा न कुछ इस रू से कि तिहरा गईं आँखें
सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
ग़ज़ल
सितम ऐ गर्मी-ए-ज़ब्त-ए-फ़ुग़ान-ओ-आह छाती पर
कभू बस पड़ गया छाला कभू फोड़ा निकल आया