आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pho.de.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "pho.de.n"
ग़ज़ल
अबु मोहम्मद सहर
ग़ज़ल
दिन में भी हम देखने वाले ख़्वाब कहाँ आँखें फोड़ें
ख़्वाबों से पहले ही हम को ताबीरों ने घेर लिया
मुज़्तर मजाज़
ग़ज़ल
मैं उस को हर रोज़ बस यही एक झूट सुनने को फ़ोन करता
सुनो यहाँ कोई मसअला है तुम्हारी आवाज़ कट रही है
तहज़ीब हाफ़ी
ग़ज़ल
वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क़ जब सर फोड़ना ठहरा
तो फिर ऐ संग-दिल तेरा ही संग-ए-आस्ताँ क्यूँ हो
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
इश्क़ में सर फोड़ना भी क्या कि ये बे-मेहर लोग
जू-ए-ख़ूँ को नाम दे देते हैं जू-ए-शीर का