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ग़ज़ल
ले के हरीम-ए-नाज़ उस के शीरीं शीरीं नग़्मों को
'दौराँ' की तौक़ीर बढ़ाए इंसाँ कितना प्यारा है
ओवेस अहमद दौराँ
ग़ज़ल
उस किसी चीज़ पे भूले से भी मचला न करे
मेरे 'दौराँ' दिल-ए-पुर-ख़ूँ को ये समझा देना
ओवेस अहमद दौराँ
ग़ज़ल
वो ब-ज़ो'म-ए-ख़ुद गुलसिताँ का है सरबराह 'दौराँ'
जो वो चाहे सो करेगा उसे कौन रोकता है
ओवेस अहमद दौराँ
ग़ज़ल
ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-हिज्राँ ग़म-ए-याराँ
ये सारे ग़म हमेशा मुझ से हम-आग़ोश रहते हैं
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
ग़ज़ल
उस को रहम आए कहाँ ये ना-उमीदी में उमीद
दिल को ख़ुश करना है शग़्ल-ए-गिर्या-ओ-ज़ारी नहीं
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
ग़ज़ल
ग़लत कि शग़्ल में मय-ख़्वार कम है सूफ़ी से
ये शग़्ल-ए-जाम मगर शग़्ल-ए-आफ़्ताब नहीं
शाग़िल उसमानी
ग़ज़ल
शैख़-जी ये भी कोई बात है मयख़ाने में
आप रोज़ा रहें हम शग़्ल-ए-मय-ओ-जाम करें
रहमत इलाही बर्क़ आज़मी
ग़ज़ल
हर शख़्स असीर-ए-ग़म-ए-दौराँ नहीं होता
हर अहल-ए-जुनूँ चाक-गरेबाँ नहीं होता
क़ाज़ी सय्यद ख़ुर्शीदुद्दीन ख़ुर्शीद
ग़ज़ल
ऐ जुनूँ कुछ देर शग़्ल-ए-ख़ाक-बाज़ी ही सही
दिल तो इस सहरा-ए-हस्ती में बहलना चाहिए