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नज़्म
कैफ़ी आज़मी
नज़्म
तू ने क्या देखा नहीं मग़रिब का जमहूरी निज़ाम
चेहरा रौशन अंदरूँ चंगेज़ से तारीक-तर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आँखों में भी चितवन में भी चाँद ही चाँद झलकते हैं
चाँद ही टीका चाँद ही झूमर चेहरा चाँद और माथा चाँद
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
जिसे तुम चाँद सा कहते हो वो चेहरा तुम्हारा था
सितारा सी जिन्हें कहते हो वो आँखें तुम्हारी हैं
उबैदुल्लाह अलीम
नज़्म
वो रोज़ काग़ज़ पे अपना चेहरा लिखता और गंदा होता
उस की औरत जो ख़ामोशी काढ़े बैठी थी
सारा शगुफ़्ता
नज़्म
जोश मलीहाबादी
नज़्म
जहाँ एक चेहरा दरख़्तों की शाख़ों के मानिंद
इक और चेहरे पे झुक कर हर इंसान के सीने में
नून मीम राशिद
नज़्म
मिरे ख़ुदाया मैं ज़िंदगी के अज़ाब लिक्खूँ कि ख़्वाब लिक्खूँ
ये मेरा चेहरा ये मेरी आँखें