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नज़्म
ज़िंदगी में मिल गए कितनों को सरकारी ख़िताब
मुफ़्त में इन को ख़रीदा मुफ़्त में बेचा गया
ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
नज़्म
मुफ़्त में कोठी मिली मोटर मिली पी-ए मिला
जब गया पिकनिक पे बाहर टूर का टी-ए मिला
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
दा'वा-ए-उल्फ़त जता कर मुफ़्त में रुस्वा न हो
दार पर चढ़ने से पहले राज़-ए-इश्क़ अफ़्शा न कर
ज़फ़र अली ख़ाँ
नज़्म
चाहती हूँ मिरे उश्शाक़ में कुछ फ़र्क़ न हो
मुफ़्त में कश्ती-ए-एहसास-ए-वफ़ा ग़र्क़ न हो
शकील बदायूनी
नज़्म
बिमल कृष्ण अश्क
नज़्म
इलाही इस मुश्त-ए-पर में छुप कर अदा से ये कौन गा रहा है
कि दिल पे चोटें लगा रहा है
बिलक़ीस जमाल बरेलवी
नज़्म
मगर ग़ुंचों की सूरत हूँ दिल-ए-दर्द-आश्ना पैदा
चमन में मुश्त-ए-ख़ाक अपनी परेशाँ कर के छोड़ूँगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
रूह-ए-मुश्त-ए-ख़ाक में ज़हमत-कश-ए-बेदाद है
कूचा गर्द-ए-नय हुआ जिस दम नफ़स फ़रियाद है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
लहद में सो रही है आज बे-शक मुश्त-ए-ख़ाक उस की
मगर गर्म-ए-अमल है जागती है जान-ए-पाक उस की
हफ़ीज़ जालंधरी
नज़्म
आप ने फ़ित्ना-ए-जुनूँ आप से आप उठा दिया
हाथ में ले के मुश्त-ए-ख़ाक आप ने दिल बना दिया