aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "जागते"
न जाने कितनी कशाकश से कितनी काविश सेये सोते जागते लम्हे चुरा के लाए हैं
जागते जीते हुए दूधिया कोहरे से लिपट करसाँस लेते हुए उस कोहरे को महसूस किया है?
सब माथे पे गागर धरती हैंऔर अपने घरों को जाते हुए
लोग क्यों रात को उठ के रोते हैं सोते नहींतू ने अब तक कोई शब अगर जागते भी गुज़ारी
जहाँ फ़ज़ाओं मेंदोनों के ख़्वाब जागते थे
मचलते, मुस्कुराते, जागते, जज़्बात का मंज़रतसव्वुर-आफ़रीं वो शाह-पारे याद आते हैं
मैं हूँ मैंवो जिस की आँखों में जीते जागते दर्द हैं
बे-आसों की आस है तू हीजागते सोते पास है तू ही
ख़्वाब की सीपियाँ चुनने जाए तो कहनाकि हम जागते हैं
हयात क्या इन्हें हक़ीक़तों से होना बे-ख़बरजो आँख जागती रही है आदमी की मौत पर
जहाँ पर दब गई हूँ मैंहर इक शब जागते गुज़री
जिस तरफ़ भी हम देखेंटूटते हुए लम्हे भागते हुए रस्ते जागते हुए मंज़र
कोई बतलाए मुझेमेरे इन जागते ख़्वाबों का मुक़द्दर क्या है?
पागल ख़्वाबसोते जागते जो देखता हूँ मैं
अब ज़िंदगी है वज्द मेंअब जागते हैं वलवले
रेग ऐ सहरा की रेगमुझ को अपने जागते ज़र्रों के ख़्वाबों की
जागते रहते हैं दिल की महफ़िल-ए-ख़ामोश मेंबंद कर लेते हैं आँखें नुत्क़ के आग़ोश में
सोचते सोचते थक जाएँगे नीले सागरजागते जागते सो जाएगा मद्धम आकाश
लिहाफ़ ओढ़े बदन टूटे पड़े हैंसिरहाने जागते हैं नर्म बोसे
जागते रहनाकितना अच्छा लगता था
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