aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "Da.nvaa.n"
दश्त में दामन-ए-कोहसार में मैदान में हैबहर में मौज की आग़ोश में तूफ़ान में है
खुलने लगे क़ुफ़्लों के दहानेफैला हर इक ज़ंजीर का दामन
आदमी के दामन से ज़िंदगी है वाबस्ताउस से तुम नहीं डरते
इक बार कहो तुम मेरी होहाँ दिल का दामन फैला है
चले जो यार तो दामन पे कितने हाथ पड़ेदयार-ए-हुस्न की बे-सब्र ख़्वाब-गाहों से
मरता हूँ ख़ामुशी पर ये आरज़ू है मेरीदामन में कोह के इक छोटा सा झोंपड़ा हो
बिदह यारा अज़ाँ बादा कि दहक़ाँ पर्वर्द आँ-राब सोज़द हर मता-ए-इनतिमाए दूदमानां रा
इक ज़रा हाथ बढ़ा दें तो पकड़ लें दामनउन के सीने में समा जाए हमारी धड़कन
कुछ बिखरे तिनके चिलमन केकुछ पुर्ज़े अपने दामन के
लैला-ए-नाज़ बरफ़्गंदा-नक़ाब आती थीअपनी आँखों में लिए दावत-ए-ख़्वाब आती थी
जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँसजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी
मुझे बहलने दो रंज-ओ-ग़म से सहारे कब तक दिया करोगीजुनूँ को इतना न गुदगुदाओ, पकड़ लूँ दामन तो क्या करोगी
हुआ ख़ेमा-ज़न कारवान-ए-बहारइरम बन गया दामन-ए-कोह-सार
जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ीउस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो
दहक़ाँ के नामजिस के ढोरों को ज़ालिम हँका ले गए
तू किसी और के दामन की कली है लेकिनमेरी रातें तिरी ख़ुश्बू से बसी रहती हैं
तुर्कों का जिस ने दामन हीरों से भर दिया थामेरा वतन वही है मेरा वतन वही है
जीने की ख़ातिर मरता हूँअपने फ़न को रुस्वा कर के अग़्यार का दामन भरता हूँ
क्या नहीं मुमकिन कि तेरा चाक दामन हो रफ़ूइबलीस
महमिल-ए-मज्लिस-ए-अक़्वाम की लैला से कहोख़ून दीवाना है दामन पे लपक सकता है
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