aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "achaar"
लाख ख़ुशामद कर के मुझ से ले लिए दाँत उधारमुन्नी तेरे दाँत कहाँ हैं
फिर नाम अपना क़ौम का मेमार डालिएडिग्री को मेरी लीजिए आचार डालिए
तुम्हारी अम्मी ने बार-हा तुम से ये कहा था''अचार कच्चा है' तेल की बू मिटी नहीं है
फिर आम का अचार बनाने के दिन आएफिर छुप के कहीं कैरियाँ खाने के दिन आए
मेरे खाने को बेसनी रोटीऔर आचार है यही बस है
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजेअब भी दिलकश है तिरा हुस्न मगर क्या कीजे
साज़ ख़ामोश हैं फ़रियाद से मामूर हैं हमनाला आता है अगर लब पे तो मा'ज़ूर हैं हम
नाम लेता है अगर कोई हमारा तो ग़रीबपर्दा रखता है अगर कोई तुम्हारा तो ग़रीब
तुम मगर ये क्या जानोलब अगर नहीं हिलते हाथ जाग उठते हैं
ये दौलत के भूके रिवाजों की दुनियाये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
और घबरा के किताबों में जो ली होगी पनाहहर सतर में मिरा चेहरा उभर आया होगा
ज़हर ही ज़हर है दुनिया की हवा तेरे लिएरुत बदल डाल अगर फूलना फलना है तुझे
ना-रसाई अगर अपनी तक़दीर थीतेरी उल्फ़त तो अपनी ही तदबीर थी
जो है इक नंग-ए-हस्ती उस को तुम क्या जान भी लोगेअगर तुम देख लो मुझ को तो क्या पहचान भी लोगे
जीने पे इधर बेज़ार हूँ मैं मरने पे उधर तयार है वो
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन मेंसमझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
अगर मैं समझूँके ये जो मोहरे हैं
ख़ुदा अगर दिल-ए-फ़ितरत-शनास दे तुझ कोसुकूत-ए-लाला-ओ-गुल से कलाम पैदा कर
तुम लताफ़त हो अगर मेरी लताफ़त से डरोमेरे वादों से डरो मेरी मोहब्बत से डरो
अगर उस्मानियों पर कोह-ए-ग़म टूटा तो क्या ग़म हैकि ख़ून-ए-सद-हज़ार-अंजुम से होती है सहर पैदा
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