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नज़्म
किस की बातों में सुनूँगी तेरे लहजे की खनक
किस सितारे में बसेगी तेरी आँखों की चमक
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
जब धरती करवट बदलेगी जब क़ैद से क़ैदी छूटेंगे
जब पाप घरौंदे फूटेंगे जब ज़ुल्म के बंधन टूटेंगे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
कुछ काम न आवेगा तेरे ये लाल-ओ-जमुर्रद सीम-ओ-ज़र
जब पूँजी बाट में बिखरेगी हर आन बनेगी जान ऊपर
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जो अब्र यहाँ से उट्ठेगा वो सारे जहाँ पर बरसेगा
हर जू-ए-रवाँ पर बरसेगा हर कोह-ए-गिराँ पर बरसेगा