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नज़्म
बज़्म-ए-अंजुम की हर एक तनवीर धुँदली हो गई
रख दिया नाहीद ने झुँझला के हाथों से सितार
इब्न-ए-सफ़ी
नज़्म
ये जा कर कोई बज़्म-ए-ख़ूबाँ में कह दो
कि अब दर-ख़ोर-ए-बज़्म-ए-ख़ूबाँ नहीं मैं
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तो दिल ताब-ए-नशात-ए-बज़्म-ए-इशरत ला नहीं सकता
मैं चाहूँ भी तो ख़्वाब-आवर तराने गा नहीं सकता
साहिर लुधियानवी
नज़्म
आँखों की चमक रू-कश-ए-बज़्म-ए-मह-ओ-परवीं
पैराहन-ए-ज़र-तार में इक पैकर-ए-सीमीं
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
बर्क़-ओ-आतिश से हुआ बर्बाद जिस का ख़ानुमाँ
अब वो आगाह-ए-नवेद-ए-बज़्म-ए-जाँ होने को है
फ़ज़लुर्रहमान
नज़्म
आज भी साज़ से मिरे गर्मी-ए-बज़्म-ए-सर-कशी
आज भी आतिश-ए-सुख़न शो'ला-फ़िशाँ शरर-फ़िशाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ज़िंदगी को नागवार इक सानेहा जाने हुए
बज़्म-ए-किबर-ओ-नाज़ में फ़र्ज़ अपना पहचाने हुए
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
नई उलझन नए 'उक़्दे नई मुश्किल नज़र आई
ग़रज़ तुर्फ़ा-तमाशा बज़्म-ए-आब-ओ-गिल नज़र आई
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
जो साए दूर चराग़ों के गिर्द लर्ज़ां हैं
न जाने महफ़िल-ए-ग़म है कि बज़्म-ए-जाम-ओ-सुबू