आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "farsh"
नज़्म के संबंधित परिणाम "farsh"
नज़्म
घर-बार अटारी चौपारी क्या ख़ासा नैन-सुख और मलमल
चलवन पर्दे फ़र्श नए क्या लाल पलंग और रंग-महल
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
गिरते हैं इक फ़र्श-ए-मख़मल बनाते हैं जिस पर
मिरी आरज़ूओं की परियाँ अजब आन से यूँ रवाँ हैं
मीराजी
नज़्म
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
सर्व-क़द मिट्टी के बौनों के क़दम चूमेंगे
फ़र्श पर आज दर-ए-सिदक़-ओ-सफ़ा बंद हुआ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
लहू होना था इक रिश्ते का सो वो हो गया उस दिन!!
उसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फ़र्श से उस शब
गुलज़ार
नज़्म
हाथों में पियाला शर्बत का हो आगे इक फर्राश खड़ा
फर्राश भी पंखा झलता हो तब देख बहारें जाड़े की
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
हर ज़बाँ पर अब सला-ए-जंग है ये भी तो देख
फ़र्श-ए-गीती से सकूँ अब माइल-ए-परवाज़ है