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नज़्म
वो गप शप क़हक़हे वो अपने अपने इश्क़ के क़िस्से
वो मीरास रोड की बातें वो चर्चे ख़ूब-रूयों के
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
नाम तो उन का सेवक राम था बन गए फेंकू राम
उन के ग़लत तरीक़ों ने ही किया उन्हें बदनाम
मेहदी प्रतापगढ़ी
नज़्म
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
हम पे मुश्तरका हैं एहसान ग़म-ए-उल्फ़त के
इतने एहसान कि गिनवाऊँ तो गिनवा न सकूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ