आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "guuda.d"
नज़्म के संबंधित परिणाम "guuda.d"
नज़्म
ढल चुकी रात बिखरने लगा तारों का ग़ुबार
लड़खड़ाने लगे ऐवानों में ख़्वाबीदा चराग़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ऐ दिल पहले भी तन्हा थे, ऐ दिल हम तन्हा आज भी हैं
और उन ज़ख़्मों और दाग़ों से अब अपनी बातें होती हैं
साक़ी फ़ारुक़ी
नज़्म
मैं कि ख़ुद अपने मज़ाक़-ए-तरब-आगीं का शिकार
वो गुदाज़-ए-दिल-ए-मरहूम कहाँ से लाऊँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
सरिश्क-ए-चश्म-ए-मुस्लिम में है नैसाँ का असर पैदा
ख़लीलुल्लाह के दरिया में होंगे फिर गुहर पैदा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हबीब जालिब
नज़्म
छा गई आशुफ़्ता हो कर वुसअ'त-ए-अफ़्लाक पर
जिस को नादानी से हम समझे थे इक मुश्त-ए-ग़ुबार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वो मय-ए-सरकश हरारत जिस की है मीना-गुदाज़
हिक्मत-ए-मग़रिब से मिल्लत की ये कैफ़िय्यत हुई
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
रंग-ए-रुख़्सार पे हल्का सा वो ग़ाज़े का ग़ुबार
संदली हाथ पे धुंदली सी हिना की तहरीर
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
सरापा रंग-ओ-बू है पैकर-ए-हुस्न-ओ-लताफ़त है
बहिश्त-ए-गोश होती हैं गुहर-अफ़्शानियाँ उस की