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नज़्म
जल्वा-ए-हुस्न-ए-अज़ल आए तसव्वुर में अगर
गोशा-ए-दिल में मचलते हुए अरमाँ होंगे
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
शोला-ए-हुस्न-ए-अज़ल रूह-ए-जहाँ जान-ए-हयात
सुब्ह के नूर के मानिंद निगाहों को मुनव्वर करता
वहीद अख़्तर
नज़्म
तेरे जबीं से नूर-ए-हुस्न-ए-अज़ल अयाँ है
अल्लाह-रे ज़ेब-ओ-ज़ीनत क्या औज-ए-इज़्ज़-ओ-शाँ है
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
हुस्न-ए-अज़ल की है नुमूद चाक है पर्दा-ए-वजूद
दिल के लिए हज़ार सूद एक निगाह का ज़ियाँ!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
उठ जा नज़र से मेरी हाँ ऐ हिजाब-ए-हस्ती
हुस्न-ए-अज़ल निहाँ है ज़ेर-ए-नक़ाब-ए-हस्ती
ग़ुलाम भीक नैरंग
नज़्म
ऐ गुल-ए-तर किस क़दर दिलकश है नज़्ज़ारा तिरा
हामिल-ए-हुस्न-ए-अज़ल है क़ल्ब-ए-सी-पारा तिरा
शमीम फ़ारूक़ बांस पारी
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
तेरी जबीं से नूर-ए-हुस्न-ए-अज़ल 'अयाँ है
अल्लह रे ज़ेब-ओ-ज़ीनत क्या औज-ए-‘इज़्ज़-ओ-शाँ है
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
अंजुम से बढ़ के तेरा हर ज़र्रा ज़ौ-फ़िशाँ है
जल्वों से तेरे अब तक हुस्न-ए-अज़ल अयाँ है
तिलोकचंद महरूम
नज़्म
मिरी नज़र की ये तक़्दीस-ए-अर्श-ओ-फ़र्श न हो
मैं एक हुस्न-ए-नज़र हूँ मैं एक हुस्न-ए-अज़ल
दौर आफ़रीदी
नज़्म
आसमाँ कितना ख़ूब-सूरत है
लेकिन ऐ शाहकार-ए-दस्त-ए-अज़ल जिस तरफ़ का तिरा इरादा है