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नज़्म
परतव रोहिला
नज़्म
तू हुसूल-ए-ज़र की ख़ातिर किस क़दर बेचैन है
कसब-ए-दौलत ज़िंदगी का तेरी नसबुलऐन है
माहिर-उल क़ादरी
नज़्म
हक़ीक़त का तक़ाज़ा है हो दिल को जुस्तुजू पहले
हुसूल-ए-मुद्दआ को चाहिए कुछ आरज़ू पहले
नारायण दास पूरी
नज़्म
जो कोई फ़िक्र रखता है हुसूल-ए-तंदुरुस्ती की
नज़र उस से नहीं फिरती उसूल-ए-तंदुरुस्ती की
उफ़ुक़ लखनवी
नज़्म
और एक दिन मिरी साँसों पे कोई चाँद उगा
मैं ने इक मंज़िल-ए-मक़्सद का निशाँ पा ही लिया
नसीर प्रवाज़
नज़्म
मोहब्बत जिस में लग़्ज़िश भी हुसूल-ए-कामरानी है
मोहब्बत जिस की हर काविश सुरूर-ए-जावेदानी है
ऋषि पटियालवी
नज़्म
अपनी मंज़िल की तरफ़ गर्म-ए-सफ़र है काएनात
आदमी फिर मंज़िल-ए-मक़्सद का जोया क्यों न हो
ज़फ़र अहमद सिद्दीक़ी
नज़्म
यूसुफ़ ज़फ़र
नज़्म
दिल को हो शाहज़ादी-ए-मक़्सद की धुन लगी
हैराँ सुराग़-ए-जादा-ए-मंज़िल में हम भी हों