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नज़्म
कैफ़ी आज़मी
नज़्म
हत्ता कि अपने ज़ोहद-ओ-रियाज़त के ज़ोर से
ख़ालिक़ से जा मिला है सो है वो भी आदमी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
तू ने लिख्खा था जला दूँ मैं तिरी तहरीरें
तू ने चाहा था जला दूँ मैं तिरी तस्वीरें
राजेन्द्र नाथ रहबर
नज़्म
वो बिजली है जला सकती है सारी बज़्म-ए-इम्काँ को
अभी मेरे ही दिल तक हैं शरर-सामानियाँ उस की