आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khanda"
नज़्म के संबंधित परिणाम "khanda"
नज़्म
हर मंज़िल में अब साथ तिरे ये जितना डेरा-डांडा है
ज़र दाम-दिरम का भांडा है बंदूक़ सिपर और खांडा है
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मेरे लब पर क़िस्सा-ए-नैरंगी-ए-दौराँ नहीं
दिल मिरा हैराँ नहीं ख़ंदा नहीं गिर्यां नहीं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
शाहिद-ए-मज़्मूँ तसद्दुक़ है तिरे अंदाज़ पर
ख़ंदा-ज़न है ग़ुंचा-ए-दिल्ली गुल-ए-शीराज़ पर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
बर्फ़ ने बाँधी है दस्तार-ए-फ़ज़ीलत तेरे सर
ख़ंदा-ज़न है जो कुलाह-ए-मेहर-ए-आलम-ताब पर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इक मुसलसल गर्द में डूबे हुए सब बाम-ओ-दर
जिस तरफ़ देखो अंधेरा जिस तरफ़ देखो खंडर
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
हुस्न से वहशत इश्क़ से नफ़रत अपनी ही सूरत से प्यार
ख़ंदा-ए-गुल पर एक तबस्सुम गिर्या-ए-शबनम से इंकार
हबीब जालिब
नज़्म
वो आदमी कि सभी रोए जिन की मय्यत पर
मैं उस को ज़ेर-ए-कफ़न ख़ंदा-ज़न भी देखता हूँ