आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "marmar"
नज़्म के संबंधित परिणाम "marmar"
नज़्म
जिस के परवानों में मुफ़्लिस भी हैं ज़रदार भी हैं
संग-ए-मरमर में समाए हुए ख़्वाबों की क़सम
शकील बदायूनी
नज़्म
हम ने इस अहमक़ को आख़िर इसी तज़ब्ज़ुब में छोड़ा
और निकाली राह मफ़र की इस आबाद ख़राबे में
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
इतनी गम्भीरी पे भी मर-मर के जीते हैं जनाब
सौ जतन करते हैं तो इक घूँट पीते हैं जनाब
जोश मलीहाबादी
नज़्म
जगमगाते हुए क़ुमक़ुमे, पार्क, बाग़ात और म्यूजियम
संग-ए-मरमर के बुत, धात के आदमी
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
फ़र्श-ए-मरमर पे गिरी गिर के उठी उठ के झुकी
ख़ुश्क होंटों पे ज़बाँ फेर के पानी माँगा
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
तिजारत भी मिरी होती रही तोहमत सही मैं ने
गुज़ारी है बहुत मरमर के गोया ज़िंदगी मैं ने