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नज़्म
क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या गौनें पल्ला सर-भारा
क्या गेहूँ चाँवल मोठ मटर क्या आग धुआँ और अँगारा
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
कि अब उस के अपने दुपट्टे क़मीस और शलवार चप्पल के जोड़े
नमक मिर्च आलू मटर प्याज़ लहसन चुक़ंदर टमाटर
हारिस ख़लीक़
नज़्म
मर गया भूक में ये खा के कहीं कच्ची मटर
आज की ताज़ा ख़बर आज की ताज़ा ख़बर आज की ताज़ा ख़बर
सरपट लखनवी
नज़्म
इस गुलिस्ताँ में मगर देखने वाले ही नहीं
दाग़ जो सीने में रखते हों वो लाले ही नहीं
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं
तिरे फ़िराक़ में यूँ सुब्ह ओ शाम करते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मेरे सीने पर मगर रखी हुई शमशीर सी
ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँ