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नज़्म
आम मौज़ू-ए-सुख़न में भी अयाँ लहजा-ए-ख़ास
ज़ेहन की बात में भी दिल की धमक का एहसास
अब्दुल अहद साज़
नज़्म
मैं वो हूँ जिस ने अपने ख़ून से मौसम खिलाए हैं
न-जाने वक़्त के कितने ही आलम आज़माए हैं
जौन एलिया
नज़्म
अख़्तर शीरानी
नज़्म
मजबूर बुढ़ापा जब सूनी राहों की धूल न फाँकेगा
मासूम लड़कपन जब गंदी गलियों में भीक न माँगेगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
अब मैं वो जज़्बा-ए-मासूम कहाँ से लाऊँ
मेरे साए से डरो तुम मिरी क़ुर्बत से डरो
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
हबीब जालिब
नज़्म
तब-ए-मशरिक़ के लिए मौज़ूँ यही अफ़यून थी
वर्ना क़व्वाली से कुछ कम-तर नहीं इल्म-ए-कलाम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
सोचता हूँ कि तुझे मिल के मैं जिस सोच में हूँ
पहले उस सोच का मक़्सूम समझ लूँ तो कहूँ