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नज़्म
दिगर शाख़-ए-ख़लील अज़ ख़ून-ए-मा नमनाक मी गर्दद
ब-बाज़ार-ए-मोहब्बत नक़्द-ए-मा कामिल अय्यार आमद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ख़ाक-ओ-ख़ूँ में मिल रहा है तुर्कमान-ए-सख़्त-कोश
आग है औलाद-ए-इब्राहीम है नमरूद है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
किस से कहूँ कि ज़हर है मेरे लिए मय-ए-हयात
कोहना है बज़्म-ए-कायनात ताज़ा हैं मेरे वारदात!
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मुझ से इज़्ज़त-दार डरते हैं मैं हूँ इज़्ज़त-मआब
''ईं कि मी बीनम ब बेदारीसत यारब या ब ख़्वाब''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
''सर-ए-बाज़ार मी-रक़सम'' का इल्हामी वज़ीफ़ा गुनगुनाती है
बका-ए-यार की ख़ातिर फ़ना तस्लीम करती है...
मासूम शीराज़ी
नज़्म
ये साँस सीने में घटती हुई मी लगती है
ये रोज़-ओ-शब का तफ़क्कुर ये सारी उम्र का घुन
अनीस अहमद अनीस
नज़्म
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
गुल करो शमएँ बढ़ा दो मय ओ मीना ओ अयाग़
अपने बे-ख़्वाब किवाड़ों को मुक़फ़्फ़ल कर लो