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नज़्म
मिसाल-ए-चादर-ए-ज़ैनब बढ़ाऊँ मान ज़हरा का
मिरे अज़्म-ए-सफ़र में आज तक लग़्ज़िश नहीं आई
सफ़ीया चौधरी
नज़्म
ज़िंदगी तेरी मिसाल-ए-मर्द-ए-मैदाँ हो अज़ीम
तूर हो ये जिस्म-ए-ख़ाकी रूह मानिंद-ए-कलीम
साबिर अबुहरी
नज़्म
हो अगर हाथों में तेरे ख़ामा-ए-मोजिज़ रक़म
शीशा-ए-दिल हो अगर तेरा मिसाल-ए-जाम-ए-जम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मदार-ए-अर्ज़ पर इक नुक़्ता-ए-सय्याल है लम्हा
तिलिस्म-ए-बर्क़-ए-लर्ज़ां या मिसाल-ए-क़तरा-ए-दरिया
नईम सिद्दीक़ी
नज़्म
वो हम-मशरब वो हम-सोहबत जिन्हें अपना समझते थे
मिसाल-ए-सब्ज़ा-ए-बेगाना बेगानों में रहते हैं