aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "nikharnaa"
खोने को खरा बन के निखरना नहीं अच्छाछोटे को बड़ा बन के उभरना नहीं अच्छा
कुछ और बज़्म-ए-वतन को सँवारना है अभीकुछ और अपने चमन को निखारना है अभी
पौदों पे क़तरों का बिखरनापत्तों का धुल धुल के निखरना
जान दे कर सँवारना है इसेज़ब्त-ए-ग़म से निखारना है इसे
शगूफ़ा-ए-बदन ज़रा सी देर में निखारना
हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने मेंज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
ता-ब-कै गिर्द तिरे वहम ओ तअ'य्युन का हिसारकौंद कर मज्लिस-ए-ख़ल्वत से निकलना है तुझे
वगर्ना अब के निशाना कमान-दारों काबस एक तुम हो सो ग़ैरत को राह में रख दो
हवा भी ख़ुश-गवार हैगुलों पे भी निखार है
उर्दू है मिरा नाम मैं 'ख़ुसरव' की पहेलीक्यूँ मुझ को बनाते हो तअस्सुब का निशाना
खड़ी धूप में अपने घर से निकलनावो चिड़ियाँ वो बुलबुल वो तितली पकड़ना
फ़ुसूँ-कारा निगारा नौ-बहारा आरज़ू-आराभला लम्हों का मेरी और तुम्हारी ख़्वाब-परवर
मिरा होना न होना इक बराबर हैतुम अपने ख़ाल-ओ-ख़द को आईने में फिर निखरने दो
जो मिट के हर बार फिर जिए थेनिखर गए हैं गुलाब सारे
हाथ ढलते गए साँचे में तो थकते कैसेनक़्श के बाद नए नक़्श निखारे हम ने
निखर गई है कभी सुब्ह दोपहर कभी शामकहीं जो क़ामत-ए-ज़ेबा पे सज गई है क़बा
ये कौन है जो हमें आज भी बताता हैहै वादा ख़ुद से निभाना हमें अगर अपना
फ़र्ज़ तो मुझ को निभाना है मगरदेख कि कितनी अकेली हूँ मैं!
हर इक दिल वहाँ था नज़र का निशानाबहुत याद आता है गुज़रा ज़माना
या चहचहों के वक़्त तमव्वुज तुयूर काबाँधे हुए निशाना कोई जैसे दूर का
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