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नज़्म
फ़ातिमा मेहरू
नज़्म
आज फिर करते हो किस ज़ो'म पे ज़ख़्मों का शुमार
सर-फिरो वादी-ए-पुर-ख़ार में ये तो होगा
अहमद फ़राज़
नज़्म
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुम से कोई उम्मीद रखूँ दिल-नवाज़ी की
साहिर लुधियानवी
नज़्म
सागर से उभरी लहर हूँ मैं सागर में फिर खो जाऊँगा
मिट्टी की रूह का सपना हूँ मिट्टी में फिर सो जाऊँगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
फिर वो टूटा इक सितारा फिर वो छूटी फुल-जड़ी
जाने किस की गोद में आई ये मोती की लड़ी