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नज़्म
अता मोमिन को फिर दरगाह-ए-हक़ से होने वाला है
शिकोह-ए-तुर्कमानी ज़ेहन हिन्दी नुत्क़ आराबी
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जिस की पीरी में है मानिंद-ए-सहर रंग-ए-शबाब
कह रहा है मुझ से ऐ जूया-ए-असरार-ए-अज़ल
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हक़ीक़त क्या है ये तो आप जानें या ख़ुदा जाने
सुना है जिम्मी-कार्टर आप का है पीर मौलाना
हबीब जालिब
नज़्म
कभी जो आवारा-ए-जुनूँ थे वो बस्तियों में फिर आ बसेंगे
बरहना-पाई वही रहेगी मगर नया ख़ारज़ार होगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये कौन आँख पड़ रही है मुझ पर इतने प्यार से
वो भूली सी वो याद सी कहानियाँ लिए हुए