आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sang"
नज़्म के संबंधित परिणाम "sang"
नज़्म
है अहल-ए-दिल के लिए अब ये नज़्म-ए-बस्त-ओ-कुशाद
कि संग-ओ-ख़िश्त मुक़य्यद हैं और सग आज़ाद
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
संग को गौहर-ए-नायाब-ओ-गिराँ जाना था
दश्त-ए-पुर-ख़ार को फ़िरदौस-ए-जवाँ जाना था
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
रंग हो या ख़िश्त ओ संग चंग हो या हर्फ़ ओ सौत
मोजज़ा-ए-फ़न की है ख़ून-ए-जिगर से नुमूद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
रेत के टीले पे वो आहू का बे-परवा ख़िराम
वो हज़र बे-बर्ग-ओ-सामाँ वो सफ़र बे-संग-ओ-मील
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
जिस के परवानों में मुफ़्लिस भी हैं ज़रदार भी हैं
संग-ए-मरमर में समाए हुए ख़्वाबों की क़सम
शकील बदायूनी
नज़्म
कोई जबीं न तिरे संग-ए-आस्ताँ पे झुके
कि जिंस-ए-इज्ज़-ओ-अक़ीदत से तुझ को शाद करे