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नज़्म
ज़ैनब भी राहुल के हाथ में बाँध के बोली राखी
दुख-संकट के सागर की नय्या का तू है माझी
मोहम्मद हाज़िम हस्सान
नज़्म
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
नहीं हो तुम मिरे और मेरा फ़र्दा भी नहीं मेरा
सो मैं ने साहत-ए-दीरोज़ में डाला है अब डेरा
जौन एलिया
नज़्म
सबक़ फिर पढ़ सदाक़त का अदालत का शुजाअ'त का
लिया जाएगा तुझ से काम दुनिया की इमामत का
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये खेप भरे जो जाता है ये खेप मियाँ मत गिन अपनी
अब कोई घड़ी पल सा'अत में ये खेप बदन की है कफ़नी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
पुख़्ता हो जाए तू है शमशेर-ए-बे-ज़िन्हार तू
हो सदाक़त के लिए जिस दिल में मरने की तड़प