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नज़्म
है मिरी जुरअत से मुश्त-ए-ख़ाक में ज़ौक़-ए-नुमू
मेरे फ़ित्ने जामा-ए-अक़्ल-ओ-ख़िरद का तार-ओ-पू
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
हमारी हज़ीमत के सब बे-बहा तार-ओ-पू थे
फ़ना उन की तक़दीर हम उन की तक़दीर के नौहागर हैं
नून मीम राशिद
नज़्म
प्रेम की ख़ुशबू चप्पे चप्पे में तुम को फैलाना है
सुन लो मेरी आँख के तारो ये एलान ज़रूरी है
अताउर्रहमान तारिक़
नज़्म
जीता-जागता तर-ओ-ताज़ा ख़ुदा कैसे नुमूदार हो जाएगा
जैसे सर-ब-फ़लक पहाड़ियों की यख़-बस्ता वादियों में
मोहम्मद हनीफ़ रामे
नज़्म
खींचती वक़्त-ए-सहर दिल को तिरी कू-कू न थी
छाँव में तारों की महव-ए-नग़्मा-ए-दिल-जू न थी