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नज़्म
नक़्श-ए-महबूब मुसव्विर ने सजा रक्खा था
मुझ से पूछो तो तिपाई पे घड़ा रक्खा था
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
जिस पे नाज़ाँ अपने दिल में रावन-ए-बे-पीर था
थे तिलाई बुर्ज जिस के और मुरस्सा बाम-ओ-दर
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
नज़्म
पेंशनें तनख़्वाह का अक्सर तिहाई ही रही हैं
और क़ीमत धीरे धीरे उम्र की सूरत फ़लक को छू रही है
बिमल कृष्ण अश्क
नज़्म
किसी का 'अक्स-बुज़ुर्गांतिलाई गले लगाए हुए
उदास रात की तन्हाइयों में बेदारी
अल्लामा तालिब जौहरी
नज़्म
तिलाई उँगलियों का जब मुझे क़िस्सा सुनाती है
तसव्वुर में सितारों के से पैकर खींच लाती है
नय्यर वास्ती
नज़्म
तिलाई नुक़रई जज़्बात के साँचे में ढलने को
रग-ए-तख़्ईल पर इक नश्तर-ए-तासीर बाक़ी है