aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "vast"
यहाँ मज़ाफ़ात में इस वक़्तठीक इस वक़्त
जो किस क़दर अहम हैनज़्म के वस्त में
केक को वस्त तकचीर कर रुक गई
और नज़्म के वस्त मेंमौत नहीं आनी चाहिए
ग़ार के वस्त में आन बैठूँऔर उन में से जिस जिस की आँखें झपकती चली जाएँ
किसी पेंटिंग कैलन्डर या तस्वीर से भरने की कोशिश नहीं कीइस दीवार के ऐन वस्त में
मुझे ऐसे चौराहे का भी इंतिख़ाब करना हैजिस के ऐन-वस्त में
वस्त ना वस्त का मरहलामैं ने कैसे गवारा किया
फूटता है वादी-ए-इज्ज़-ए-बयाँ के वस्त सेफैलती है ख़ीरगी
बे-सब्र, झुक कर हाथ से अपने फ़नावस्त-ए-समुन्दर में उठाती है भँवर
बादलों की आँखों से टपकते क़तरों के आवाज़ेऔर पहाड़ों के वस्त से निकलते
जो बख़्त में लिखी गईऐन वस्त में बदन के खींची गई
सिपाही तलवार की धार से लुढ़कते हुएमैदान-ए-जंग के वस्त में फ़त्ह
सर पर मुड़े-तुड़े दो सींगऔर सीने के वस्त में इक
एक बोसीदा 'इमारतवस्त में खंडरों के इस्तादा है यूँ
दालान से अंदर की जानिब गिरते पड़ते वस्त में आ कर एक भेड़िये का रूप धार कर नोचने लगते हैंमेरे मिसरों के अकसर-ओ-बेशतर रुक्न तुम्हारी ‘अदम-मौजूदगी पर एहतिजाजन गिर रहे हैं
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
आ गया ऐन लड़ाई में अगर वक़्त-ए-नमाज़क़िबला-रू हो के ज़मीं-बोस हुई क़ौम-ए-हिजाज़
मैं ने माना कि शब ओ रोज़ के हंगामों मेंवक़्त हर ग़म को भुला देता है रफ़्ता रफ़्ता
कौन है तारिक-ए-आईन-ए-रसूल-ए-मुख़्तारमस्लहत वक़्त की है किस के अमल का मेआर
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