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नज़्म
है कोई तो बात जो वो आवाज़ दबाने पे आमादा है
लगा ले जितना दम हो अपना भी मज़बूत इरादा है
सचिन देव वर्मा
नज़्म
इस जन्नत पर हम ने अपने तन-मन-धन को वारा है
हम कश्मीरी हम कश्मीरी ये कश्मीर हमारा है
अर्श मलसियानी
नज़्म
दलील से वरा है सारी गुफ़्तुगू का सानेहा
ज़रा ज़रा सी ज़िंदगी बड़ा बड़ा सा ख़ौफ़ है
इलियास बाबर आवान
नज़्म
दिल की कश्मकश लफ़्ज़ों में निकाल देता हूँ
जिस्म क्या मैं रूह के कपड़े उतार लेता हूँ
सचिन देव वर्मा
नज़्म
रंज-ओ-राहत की कशाकश से वरा है ज़िंदगी
इज्तिहाद-ए-इल्म-ओ-फ़न से मा-सिवा है ज़िंदगी