तरक़्क़ीपसंद तहरीक के चंद शायरों की ग़ज़लें

तरक़्क़ीपसंद का दौर वो

दौर था, जब सारे अदीब- शायर हमारे समाज को बेहतर बनाने की कोशिश में नग़मे बुन रहे थे | यहाँ उस समय के चंद शायर की चंद ग़ज़लें दी जा रही हैं |

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बात जब दोस्तों की आती है

ख़ुमार बाराबंकवी

आज मुद्दत में वो याद आए हैं

जाँ निसार अख़्तर