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आख़री मुलाक़ात

एडगर एलन पो

आख़री मुलाक़ात

एडगर एलन पो

MORE BYएडगर एलन पो

    स्टोरीलाइन

    ये कहानी मशहूर मुसन्निफ़ (लेखक) एडगर एलन पो की 'The Assignation' का उर्दू तर्जुमा (अनुवाद) है, जो वेनिस के खू़बसूरत पस-मंज़र (पृष्ठभूमि) में मोहब्बत, हुस्न और मौत की एक गहरी अलमिया दास्तान (दुखांत कहानी) बयान करती है। कहानी एक ऐसे दौलतमंद, आर्ट के दिल-दादा (प्रेमी) नौजवान रईस और एक मुअज़्ज़ज़ (प्रतिष्ठित) ख़ातून (महिला) के गिर्द घूमती है जो मुआशिरती (सामाजिक) बंदिशों और रस्म-ओ-रिवाज की वजह से एक नहीं हो पाते। अपनी अधूरी मगर कामिल (पूर्ण) मोहब्बत को ला-फ़ानी (अमर) बनाने के लिए, वो दोनों दुनियावी बंधनों को तोड़ कर ख़ामोशी से मौत को गले लगा लेते हैं।

    मैं एक शाम वीन्स की नहरों के किनारे चहल-क़दमी कर रहा था। पानी पर डूबते सूरज की सुनहरी रौशनी बिखरी हुई थी और शहर हमेशा की तरह ख़्वाब की तरह ख़ामोश मालूम होता था।

    अचानक एक औरत की दिल दहला देने वाली चीख़ सुनाई दी। मैंने देखा कि एक नन्हा बच्चा अपनी आया की गोद से फिसल कर सीधा नहर में जा गिरा था। चंद लम्हों के लिए हर तरफ़ सन्नाटा छा गया। लोग घबरा कर पानी की तरफ़ देखने लगे, मगर किसी को समझ ना आई कि क्या करे। इसी वक़्त एक नौजवान रईस बिजली की सी तेज़ी से आगे बढ़ा और नहर में छलाँग लगा दी। चंद लम्हों बाद वो बच्चे को सही सलामत बाहर ले आया। माँ ने अपने बच्चे को सीने से लगा लिया। उसकी आँखों में शुक्र-गुज़ारी भी थी और एक अजीब सी बे-चैनी भी। मुझे पहली ही नज़र में महसूस हुआ कि इस औरत, इस नौजवान और इसके उम्र-रसीदा शौहर के दरमियान कोई ऐसा राज़ मौजूद है जिसे सब छुपाना चाहते हैं।

    चंद दिन बाद इत्तिफ़ाक़ से मेरी मुलाक़ात इसी नौजवान रईस से हुई। वीन्स भर में इसका चर्चा था। लोग कहते थे कि वो बेहद दौलतमंद है, मगर दौलत से ज़ियादा उसे हुस्न, मौसीक़ी, मुसव्विरी और शाइरी से इश्क़ है। वो आम आदमियों जैसा नहीं था। उसकी गुफ़्तगू में एक अजीब कशिश थी। कभी यूँ लगता जैसे वो फ़ल्सफ़ी हो, कभी शाइर, और कभी ऐसा शख़्स जिसने ज़िंदगी की हर ख़ुशी आज़मा कर भी सुकून ना पाया हो।

    उसने मुझे अपने महल आने की दावत दी। उसका महल किसी अजायब घर से कम ना था। हर दीवार पर क़ीमती तस्वीरें, नायाब मुजस्समे और क़दीम नवादिरात सजे हुए थे। ऐसा महसूस होता था जैसे दुनिया की हर हसीन चीज़ किसी ना किसी तरह यहाँ जमा हो गई हो। वो हर तस्वीर को इस तरह देखता जैसे किसी पुराने दोस्त से मुलाक़ात कर रहा हो। उसने कहा, ”आम लोग दौलत जमा करते हैं। मैं हुस्न जमा करता हूँ। ख़ूबसूरती ही वो वाहिद चीज़ है जो इंसान को ख़ुदा के क़रीब ले जाती है।“ मैंने महसूस किया कि वो हुस्न को सिर्फ़ पसंद नहीं करता था, उस की इबादत करता था।

    बातों ही बातों में उसने उस औरत का ज़िक्र छेड़ दिया जिसका बच्चा उसने बचाया था। उसकी आवाज़ बदल गई। पहली बार मुझे महसूस हुआ कि उसके दिल में एक ऐसा ज़ख़्म है जिसे वो दुनिया से छुपाए हुए है। वो औरत एक मुअज़्ज़ज़ रईस की बीवी थी, मगर उसका दिल किसी और का हो चुका था। दोनों जानते थे कि उनका साथ मुम्किन नहीं। मुआशरा, इज़्ज़त, ख़ानदान और रस्म-ओ-रिवाज उनके दरमियान दीवार बन कर खड़े थे।

    चंद रोज़ बाद मुझे उस औरत की तरफ़ से एक मुख़्तसर सा पैग़ाम मिला। उसमें सिर्फ़ इतना लिखा था, ”आज रात सब कुछ ख़त्म हो जाएगा।“ मैं घबरा गया। मैं फ़ौरन उस रईस के महल की तरफ़ दौड़ा। वो ग़ैर-मामूली सुकून के साथ मेरा इंतिज़ार कर रहा था, जैसे किसी तवील सफ़र पर रवाना होने वाला मुसाफ़िर। उसने मुस्कुरा कर कहा, ”कभी-कभी ज़िंदगी इतनी मामूली हो जाती है कि मौत ज़ियादा ख़ूबसूरत महसूस होने लगती है।“ उसकी मेज़ पर दो प्याले रखे थे। मुझे फ़ौरन अंदाज़ा हो गया कि उनमें शराब नहीं, कुछ और है।

    रात गहरी हो चुकी थी। वो औरत भी वहाँ पहुँच गई। दोनों ने एक दूसरे की तरफ़ ऐसे देखा जैसे बरसों की जुदाई चंद लम्हों में सिमट आई हो। उनके दरमियान बहुत कम अल्फ़ाज़ बोले गए। शायद इसलिए कि अस्ल बातें पहले ही दिल एक दूसरे से कह चुके थे। उन्होंने ख़ामोशी से ज़हर पी लिया। किसी ने चीख़ नहीं मारी। किसी ने पछतावा ज़ाहिर नहीं किया। वो एक दूसरे का हाथ थामे ऐसे बैठे रहे जैसे नींद उन पर आहिस्ता-आहिस्ता उतर रही हो। चंद लम्हों बाद दोनों हमेशा के लिए ख़ामोश हो गए।

    मैं देर तक उनके बे-जान चेहरों को देखता रहा। पहली बार मुझे एहसास हुआ कि बाज़ लोग ज़िंदगी से नहीं, अपने ख़्वाबों से मोहब्बत करते हैं। और जब ख़्वाब टूट जाएँ तो उन्हें दुनिया की कोई दौलत, कोई इज़्ज़त और कोई कामयाबी ज़िंदा नहीं रख सकती।

    वीन्स की नहरों पर अगली सुबह भी सूरज उसी तरह तुलूअ हुआ। कश्तियों की आमद-ओ-रफ़्त जारी रही। लोग अपने मामूल के कामों में मसरूफ़ रहे। सिर्फ़ दो ऐसे लोग कम हो गए थे जो यक़ीन रखते थे कि कामिल हुस्न और कामिल मोहब्बत इस दुनिया में नहीं मिल सकती, इसलिए उन्होंने इसे किसी और दुनिया में तलाश करने का फ़ैसला कर लिया।

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